महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। गृह विभाग द्वारा 17 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक यह कानून 28 अगस्त 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी होगा।
क्या है नए कानून में?
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य जबरदस्ती, दबाव, धोखे, प्रलोभन या किसी भी अवैध तरीके से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।
यदि कोई व्यक्ति बल, छल या लालच देकर किसी का धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में 7 साल तक की सजा का प्रावधान है और यह अपराध गैर-जमानती होगा।
यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे 60 दिन पहले निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष आवेदन देना अनिवार्य होगा।
सबसे चर्चित प्रावधान:
कानून के उस प्रावधान को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है जिसमें धोखे या सिर्फ धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए गए विवाह का जिक्र है। जानकारी के अनुसार, अगर यह साबित होता है कि विवाह केवल धर्म परिवर्तन के लिए किया गया था, तो उस विवाह की वैधता पर सवाल उठेगा और उससे जन्मे बच्चे की धार्मिक पहचान के लिए मां के विवाह-पूर्व मूल धर्म को आधार माना जाएगा।
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद सियासी और सामाजिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
0 Comments